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लगता है सीएम योगी को गुडम्बा थाना व डॉ. विजय वर्मा के सिद्धार्थ हॉस्पिटल का भी करना पड़ेगा निरिक्षण

लॉकडाउन की आंढ मे जबरन कब्जा करने का खेल धड़ल्ले से बेखौफ जारी

लगता है सीएम योगी को गुडम्बा थाना व डॉ. विजय वर्मा के सिद्धार्थ हॉस्पिटल का भी करना पड़ेगा निरिक्षण

—लॉकडाउन की आंढ मे जबरन कब्जा करने का खेल धड़ल्ले से बेखौफ जारी
—कोरोना के दौर मे संघर्ष कर रहे डॉक्टरों की धुमिल करने का काम कर रहें सिद्धार्थ हॉस्पिटल के डॉ. विजय वर्मा
—रक्षामंत्री राजनाथ सिंह द्वारा चिन्हित किए टॉप थानों में गुडम्बा थाना पर खड़े हुऐ सवाल
—गुडम्बा थाना प्रभारी फरीद अहमद एक बार फिर सवालों के लाल घेरे में

विशेष संवाददाता— हर्षित मिश्रा

राजधानी लखनऊ। गुडम्बा थाना क्षेत्र के अन्तर्गत में जानकीपुर कुर्सी रोड पर स्थित सिद्धार्थ हॉस्पिटल पर अवैध तरीके से गरीब परिवार के आशियाने को ढहाने का आरोप लगा है।

जी हां आपको पुलिस के मुताबिक कल्लु गुप्ता पुत्र मुन्नाशाह का प्लाट जानकीपुरम कुर्सी रोड सिद्धार्थ हॉप्टिल के सामने रोड के दूसरी तरफ है। वही प्लाट कल्लु गुप्ता ने सिद्धार्थ हॉस्पिटल पर प्लाट पर अवैध तरीके से कब्जा कर प्लाट के किनारे बनी दीवारो को रातों रात गिराने का अरोप लगाया है।

थाना गुडम्बा अखिर क्यों सीएम योगी को छवी को धुमिल करने का कर रहा है काम

वहीं आलम ये रहा की जब स्वतंत्र प्रभात के पत्रकार हर्षित मिश्रा ने पीढ़ित से जब इस मामले को लेकर और पूंछताछ की तो पीढित कल्लु गुप्ता ने बताया की दीवारा गिराने व अवैध कब्जा करने की सूचना लेकर जब वे गुडम्बा थाने गये तो थाने के तैनात कमलेश कुमार दीवान ने उन्स यह चौकी जाने का रास्ता दिखा कर रफ्फुचक्कर कर दिया।

इसके बाद वह स्थानिय सेक्टर जे जानकीपुरम पुलिस चौकी पहुंचे तो पीढ़ित ने आपनी परेशारी चौकी इंचार्ज भानु प्रताप सिंह से बताया तो वहां पर भी पीढ़ित कि किसी ने एक ना सुनी और तो और ये तब है जब की पीढ़ित ने यह तक बताया की जब वे पुुलिस के पास सिद्धार्थ हॉस्पिट कि शिकायत को लेकर को लेकर गये तो सिद्धार्थ हास्पिट के मालिक डॉ. विजय वर्मा ने उन्होंने यह पुलिस के पास जाने का अंजाम ठिक न होने की धमकी तक दे डाली।

अब सवाल ये खड़ा होता है की पीढ़ित ऐसी स्थित शिकायत की चिठ्ठी लेकर कर दर—दर भटकने को मंजूर है और हो भी क्यो न बात ही जो ऐसी है समझ ये नहीं आता की थाना गुडम्बा अखिर क्यों सीएम योगी को छवी को धुमिल काम कर रहा है। उनका थाना जाना भी व्यर्थ गया और दर दर भटकने को मजबूर कर दिया गया।

कमीश्नरेट तो है लेकिन प्रशासन के आलाधिकारी व राज्य सरकार पर तो बड़ा सवाल खड़ा होता है की क्या यही है राजधानी लखनऊ की कानून व्यवस्था इसका जवाब पीढित कल्लु गुप्ता को जानने अधिकार है। प्रदेश सरकार कानून व्यवस्था को लेकर वादें तो बड़े—बड़े करती है इस मामले ने तो मानो कानून व्यवस्था को लेकर किये गऐ वादों की पोल खोल कर रख दी।

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